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राजस्थान: दो समाजों के बीच हुए खूनी संघर्ष में हत्या के 14 अभियुक्तों को आजीवन कारावास, रास्ते के विवाद को लेकर हुआ था झगड़ा

विशिष्ट न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अनिता सिंदल ने हत्या के मामले में 14 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जानिए पूरा मामला

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अलवर

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Santosh Trivedi

Nov 25, 2025

COURT

फाइल फोटो पत्रिका

अलवर। विशिष्ट न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अनिता सिंदल ने करीब 15 साल पुराने हत्या के मामले में 14 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी अभियुक्तों को अलग-अलग अर्थदंड से भी दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक योगेन्द्र सिंह खटाणा ने बताया कि 16 सितंबर, 2010 को खेरली थाने में घाट भंवर के मीणा समाज ने मामला दर्ज कराया था, जिसमें बताया गया था कि उनके रास्ते को सैनी समाज के लोगों ने जोत दिया था।

इसके बाद गांव वालों ने रास्ते में पत्थरगढ़ी करा दी, लेकिन आरोपी पक्ष के लोगों ने पत्थरों को उखाड़ दिया। इस बात को लेकर हुए झगड़े में रामस्वरूप मीणा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी इलाज के दौरान एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर में मौत हो गई। इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी चोटें आई। मामले में पुलिस ने आरोपी पक्ष के 17 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।

इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 31 गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। जिनके आधार पर न्यायालय ने पप्पूराम, बबलू, मुकेश, विजय, नरोत्तम, बच्चूराम, लालाराम, प्रकाश, शंभु, रामबाबू, वकील, कुंदन, राधेश्याम और हरिमोहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

दूसरे पक्ष के 15 लोगों को 2-2 साल का कारावास

सैनी समाज के लोगों द्वारा मीणा समाज के लोगों के खिलाफ मारपीट का क्रॉस केस दर्ज कराया था। मामले में न्यायालय ने मीणा समाज के 15 लोगों को 2-2 साल के साधारण कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक खटाणा ने बताया कि न्यायालय ने श्योप्रसाद, होती, अमरसिंह, राकेश, बनवारी, काड़ा, रामसिंह, अशोक, रमेश, राजेन्द्र, पुट्टल, नारायण, कमल, ननगू और सुरजन को 2-2 साल के साधारण कारावास सजा सुनाई है।

  • न्यायालय के इस निर्णय से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। साथ ही समाज में कानून की अवधारणा मजबूत होगी। जिस मामले को गांव के पंच-पटेल आपसी समझाइश से निपटा सकते थे, उसमें कुछ लोगों की नासमझी से कितने गंभीर परिणाम हो सकते हैं, यह न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट होता है।

योगेन्द्र खटाणा, विशिष्ट लोक अभियोजक