
तीनों बच्चे। फोटो पत्रिका
Alwar News : अलवर शहर के दारुकूटा मोहल्ला गली नंबर 10 में रहने वाले तीन मासूमों के सिर से पहले पिता का साया उठ चुका है। इसी सदमे में मां अपना मानसिक संतुलन खो बैठी और घर से चली गई, आज तक उसका कोई अता-पता नहीं है। घर में कमाने वाला कोई नहीं रहा।
हालत यह है कि इन बच्चों को न खाने को मिल रहा है और न पहनने को। बच्चों की उम्र 6 से 9 साल है। इनमें भारती सबसे बड़ी और दीपांशु व राज छोटे हैं। इनकी पढ़ाई भी छूट चुकी हैं। बच्चे अपने मां और पिता को याद कर रोते हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। पड़ोस में रहने वाले लोग ही इनकी मदद कर रहे हैं।
फिलहाल इनकी देखभाल बुआ रेखा जायसवाल कर रही हैं, लेकिन वह भी पारिवारिक कारणों से इन्हें अपने घर पर नहीं रख सकती हैं। कभी कभार आकर संभालती हैं, ऐसे में बच्चे सड़क पर आ गए हैं। मोहल्ले के लोग इन्हें खाने-पीने को दे देते हैं। जिस घर में यह तीनों बहन भाई रह रहे हैं वो पुश्तैनी मकान है, जो जर्जर हालत में हैं। छज्जे-पटाव भी टूटे हुए हैं। ऐसे में इनके गिरने का खतरा हर समय बना हुआ हैं।
बुआ रेखा जायसवाल ने बताया कि पिता की मौत के बाद चार महीने पहले ही मां ने भी बच्चों को छोड़ दिया है। मां कहां है, किस हालत में हैं, कुछ भी नही पता। यदि इन बच्चों को सरकारी सहायता और संरक्षण मिल जाए तो इनका जीवन सुधर सकता है।
उन्होंने कहा कि ये मेरे भाई की निशानी है, मैं इनको अपने से दूर नहीं कर सकती, लेकिन मेरी आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते मजबूर हूं और इन्हें अपने साथ नहीं रख सकती।
Published on:
15 Nov 2025 02:00 pm
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