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प्रकाश गंगावत के जिलाध्यक्ष बनने के पीछे की क्या है पूरी स्टोरी ?

अलवर कांग्रेस को प्रकाश गंगावत के रूप में नया जिलाध्यक्ष मिल गया है। संगठन सृजन अभियान के तहत जिले से छह नेताओं के नाम का पैनल तैयार किया गया था।

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प्रकाश गंगावत। फोटो: पत्रिका

अलवर कांग्रेस को प्रकाश गंगावत के रूप में नया जिलाध्यक्ष मिल गया है। संगठन सृजन अभियान के तहत जिले से छह नेताओं के नाम का पैनल तैयार किया गया था। इसमें गंगावत का नाम शामिल था। दिल्ली में जब केसी वेणुगोपाल के साथ एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की चर्चा हुई तो दोनों नेताओं ने गंगावत के नाम की पैरवी की। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को केवल प्रकाश प्रकाश गंगावत का ही नाम भेजा गया। यही वजह रही कि अलवर जिलाध्यक्ष का नाम बिना किसी झिझक के घोषित कर दिया गया।

मिल गए थे संकेत, मगर चुप्पी साधी

पार्टी ने भले ही नाम की घोषणा 22 नवंबर को हुई, लेकिन कई नेताओं के जरिए कृष्ण मुरारी और प्रकाश गंगावत पहले ही संकेत मिल गए थे। लेकिन अधिकृत घोषणा के बाद ही नेताओं ने मुंह खोला। बड़े नेताओं ने भी चुप्पी साधे रखी। ताकि पार्टी लाइन से अलग कोई बयान न दिया जाए।

सफिया जुबेर भी सक्रिय नजर आईं

नेताओं के पैनल में पूर्व विधायक सफिया जुबेर का भी नाम था। वे भी सक्रिय नजर आईं। लेकिन पार्टी ब्राह्मण वर्ग से ही अध्यक्ष बनाना चाहती थी। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा और कृष्ण मुरारी गंगावत का नाम सबसे मजबूत। मिश्रा लंबे समय से अध्यक्ष पद पर थे, इसलिए पार्टी ने नए चेहरे को यह पद सौंपा है।

अंदरखाने विरोध, खुलकर बोलने से बच रहे नेता

खैरथल. नए जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद अंदरखाने विरोध हो रहा है। कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन अपने नेताओं के जरिए संगठन तक बात को पहुंचाया जा रहा है। जिन नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है, उनकी सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने जिले में वर्षों से संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है।