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इनसाइड स्टोरी: अयोध्या के राम मंदिर को बनाने में क्या-क्या लगा? 4,000 मजदूर, 5 साल 1,800 करोड़ रुपये और…

Ram Temple Inside Story: इनसाइड स्टोरी: अयोध्या के राम मंदिर को बनाने में क्या-क्या लगा? 4,000 मजदूर, 5 साल 1,800 करोड़ रुपये और...

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what did it take to build ram temple in ayodhya know the inside story

इनसाइड स्टोरी: अयोध्या के राम मंदिर को बनाने में क्या-क्या लगा? फोटो सोर्स-IANS

Ram Temple Inside Story: अयोध्या में राम मंदिर पर 25 नवंबर को PM नरेंद्र मोदी ने 'धर्म ध्वजा' लहराई। राम मंदिर को समय, मौसम और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने लायक बनाने के लिए CBRI रुड़की, IIT मद्रास, दिल्ली, मुंबई और गुवाहाटी के इंजीनियर्स और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स की मदद ली गई। 4,000 से ज्यादा मजदूरों और कारीगरों ने 5 साल तक चौबीसों घंटे काम किया।

50 एकड़ खुली जगह

25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर में झंडा फहराने की रस्म में हिस्सा लिया जो मंदिर के पूर्ण निर्माण पूरा होने का प्रतीक है। मुख्य मंदिर परिसर 2.7 एकड़ में फैला है। 20 एकड़ कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल किया गया है। 50 एकड़ खुली जगह है और लगभग 30 एकड़ ग्रीन बेल्ट के लिए है।

3 मंजिला मंदिर 161 फीट ऊंचा,

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कंस्ट्रक्शन कमिटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा का कहना है कि मुख्य मंदिर का कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है। लैंडस्केपिंग चल रही है और बाउंड्री वॉल और ऑडिटोरियम का काम 2026 के आखिर तक पूरा करने का टारगेट है। उन्होंने कहा कि शुरुआती डोनेशन में मिले 3,000 करोड़ रुपये में से कंस्ट्रक्शन पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये खर्च हुए। तीन मंजिला मंदिर 161 फीट ऊंचा, 235 फीट चौड़ा और 360 फीट लंबा है।

जालियां भी टाइटेनियम की बनी हैं

राजस्थान के बंसी पहाड़-पुर सैंडस्टोन से बने इस मंदिर में लोहा या स्टील नहीं है, क्योंकि जंग लगने की वजह से इसकी लाइफ कम हो सकती थी। यहां तक ​​कि बंदरों और पक्षियों को दूर रखने के लिए बनी जालियां भी टाइटेनियम की बनी हैं। सूत्रों की माने तो 31 जालियां बनाने के लिए हैदराबाद की पब्लिक सेक्टर कंपनी मिश्र धातु निगम लिमिटेड से 12.5 टन टाइटेनियम खरीदा गया था। ग्राउंड फ्लोर पर देवी-देवताओं की नक्काशी वाले करीब 160 कॉलम हैं। इसमें गर्भ गृह है जहां राम लल्ला की मूर्ति है।

दरवाजों पर चढ़ी है सोने की परत

जनवरी 2024 में पहले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद मंदिर में काला ग्रेनाइट लगाया गया है। मंदिर के 47 दरवाजों में से 14 ग्राउंड फ्लोर पर हैं और उन पर सोने की परत चढ़ी है। पहली मंजिल पर राम दरबार है। इसमें भगवान राम के 'राजा रूप', सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां हैं। सभी मूर्तियां राजस्थान के सफेद मकराना मार्बल से बनी हैं। इस मंजिल पर 132 कॉलम हैं, सभी पर नक्काशी की गई है। इस साल 5 जून को दूसरे प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद 13 जून को राम दरबार का पर्दा खोला गया था।

2 मंजिला परकोटा

5वीं सदी के नागरा स्टाइल के आर्किटेक्चर और डिजाइन में बने मुख्य कॉम्प्लेक्स में गर्भ गृह के अलावा 5 मंडप (हॉल) हैं। ये कीर्तन और प्रार्थना मंडप हैं जो अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए हैं। मुख्य मंदिर परिसर के बाहर दो मंजिला परकोटा (बाहरी दीवार) है, जो लगभग 750 मीटर लंबा और 14 फीट मोटा है। ग्राउंड फ्लोर पर अलग-अलग देवताओं- सूर्य, शिव, भगवती, गणेश, हनुमान और माता अन्नपूर्णा को समर्पित 6 मंदिर हैं। इसके अलावा 7 ऋषियों, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, वाल्मीकि, अगस्त्य, निषाद राज, अहिल्या और माता शाबरी के सप्त मंदिर भी हैं। जिन्होंने भगवान राम के जीवन में अहम भूमिका निभाई।

सभी के लिए खुला है ग्राउंड फ्लोर

ग्राउंड फ्लोर सभी के लिए खुला है। जहां भक्तों को दर्शन के लिए 1 बार में 3 की लाइन में अंदर और बाहर जाने की व्यवस्था है। पहली मंजिल पर जगह की कमी के कारण सिर्फ स्पेशल पास वालों को ही जाने की इजाजत है। सूत्रों की माने तो सुबह से शाम तक अलग-अलग स्लॉट में पास मुफ्त में दिए जाते हैं। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहली मंजिल पर एक बार में ज्यादा से ज्यादा लगभग 300 तीर्थयात्री हों।

CBRI के सीनियर साइंटिस्ट ने क्या कहा?

रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. देब-दत्ता घोष का कहना है, "जब 2020 में नींव रखने का काम शुरू हुआ था तो हमने उसी समय आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा के दिए गए डिजाइन के आधार पर मॉडल और मटीरियल पर एक साइंटिफिक स्टडी शुरू की। 6 महीने की लंबी स्टडी और 50 से ज्यादा कंप्यूटर मॉडल के सिमुलेशन के बाद फाइनल स्ट्रक्चरल डिजाइन की सलाह दी गई थी।" उन्होंने कहा कि बंसी पहाड़पुर सैंडस्टोन इस्तेमाल करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आसानी से मिल जाता है, नक्काशी करना आसान है और टिकाऊ भी है।"


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