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DEEO Recruitment : राजस्थान में शिक्षा विभाग 27 साल बाद करेगा बड़ा बदलाव, डीईईओ स्तर पर भर्ती का लाएगा नया फॉर्मूला

DEEO Recruitment : राजस्थान में शिक्षा विभाग 27 साल बाद एक नए बदलाव की तैयारियों में जुटा है। डीईईओ स्तर पर 50-50 फीसदी के फॉर्मूले से सीधी भर्ती करने की उम्मीद है।

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Rajasthan education department big change after 27 years DEEO level recruitment bring new formula

फाइल फोटो पत्रिका

DEEO Recruitment : गत प्रदेश सरकार के कार्यकाल में दबी शिक्षा अधिकारियों की सीधी भर्ती प्रक्रिया को लेकर 27 साल बाद एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। इससे प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जगी है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा, तो जिलों में डीईईओ और उनके समकक्ष पदों पर बुजुर्गों के साथ करीब ढाई सौ अनुभवी युवा शिक्षक शिक्षा विभाग की कमान संभालेंगे। इससे विभागीय निर्णय क्षमताओं के साथ नवाचारों में वृद्धि होगी। वहीं, शिक्षा का स्तर सुधरने के आसार हैं।

गौरतलब है कि हाल ही बीकानेर निदेशालय स्तर पर हुई बैठक में इस भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। वैसे मसला नया नहीं है। सन 1998 में गहलोत सरकार के समय भी इस पर मशक्कत हुई थी। प्रक्रिया को लेकर नियम भी बनाए। सीबीईईओ के नए पदों के सृजन के सिवा कोई ठोस कदम नहीं उठे। नतीजे में पदोन्नति पर रिटायरमेंट की कगार वाले वरिष्ठों लगाने का क्रम ही चला है।

यह है डीईईओ एवं समकक्ष पदों का गणित

पदनाम - स्वीकृत पद
डीईईओ (प्रा.) 41
डीईईओ (मा.) 41
सीबीईओ 378
एडीपीसी 33
डाइट प्रधानाचार्य 33
कुल पद 526

… इन्हें भी तभी मिलेगा अवसर

पूर्ववर्ती सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत कर लेवल-14 प्रधानाध्यापक को उपप्रधानाचार्य के पद में समाहित कर दिया गया। पहले यह पद आधा वरिष्ठ अध्यापक पदोन्नति और आधा दस वर्ष अनुभव-आधारित सीधी भर्ती से भरा जाता था। बदलाव से पदोन्नति व्याख्याता स्तर तक सीमित हो गई, तो तृतीय और द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के लिए उच्च स्तर पर पहुंचना मुश्किल हो गया। डीईओ सीधी भर्ती से समर्पित, लेकिन ऐसे कुंठित युवा शिक्षकों को आगे बढ़कर अपने इलाके के स्कूलों के लिए कुछ खास करने का मौका मिलेगा।

ये आती रही हैं मुश्किलें

पदोन्नति से डीईईओ बनाने की पुरानी परंपरा में क्षेत्रीय नेताओं के दबाव और अफसर के अपने निजी रसूखात से अधिकांश जिले प्रभावित रहे हैं। भ्रष्टाचार-अनुशासन से जुड़े मामले हो या वित्तीय मसले, कार्यालयी व्यवस्था हो या कोई नई पहल, अपने सेवाकाल के चंद माह शेष होने से तकरीबन सभी अफसर औपचारिक जिम्मा ही निभाते रहे। इससे मुख्यालय के निर्देशों की पालना करानी हो या क्षेत्रीय समस्याओं का निदान, बचा कार्यकाल टलते-टालते पूरा करने के बाद कुर्सी खाली करते ही दूसरे पदोन्नत होकर बैठते रहे हैं।

यह भी फायदा

पदोन्नति के कुछ माह में रिटायरमेंट से डीईईओ की सीट खाली होने पर अक्सर उस स्तर के अधिकारी नहीं मिलते। फिर जब तक अधिकारी रहे, उनके कामकाज का मनोयोग कम पाकर अधीनस्थ भी सुषुप्त रहे हैं। जनजाति बहुल डूंगरपुर में तो सीडीईओ का पद लंबे समय से रिक्त ही है। ऐसे में कार्यवाहकों के भरोसे ही यह पद चल रहा है। ऐसे में दोनों विभागों का कार्य प्रभावित हो रहा है। अब सीधी भर्ती से आधे युवा आएंगे तो लंबे समय तक रिक्तियों की समस्या के साथ कामकाज की ढिलाई खत्म होगी।

सरकार की नई योजना

सरकार 50 फीसदी पद पदोन्नति और 50 फीसदी पद नई भर्ती से भरने की तैयारी कर रही है। यह होता है तो इससे शिक्षा विभाग में और अधिक बेहतर परिणाम मिलेंगे। युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
आरएल डामोर, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी

विभाग का यह कदम माध्यमिक शिक्षा को देगा नई दिशा

विभाग का यह कदम माध्यमिक शिक्षा को नई दिशा देगा। भर्ती में 5 वर्ष से अधिक अनुभवी तृतीय, द्वितीय श्रेणी शिक्षकों, व्याख्याताओं व प्रिंसिपल को शामिल करना चाहिए, जिससे विविधता और समर्पण सुनिश्चित हो।
डा. ऋषिन चौबीसा, प्रदेश उपाध्यक्ष, शिक्षक संघ (राष्ट्रीय)


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