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उम्मीद की डाक.. बीमा और सरकारी योजनाओं की पहुंच से बढ़ा गांवों का आत्मविश्वास

सरहदी जिले जैसलमेर की रेत में अब उम्मीद की डाक दौड़ रही है। गांव-गांव में डिजिटल बैंकिंग, बीमा सुरक्षा, सरकारी लाभ और रोजगार के अवसर पहुंचाकर डाक विभाग ने विकास की नई परिभाषा लिखी है।

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सरहदी जिले जैसलमेर की रेत में अब उम्मीद की डाक दौड़ रही है। गांव-गांव में डिजिटल बैंकिंग, बीमा सुरक्षा, सरकारी लाभ और रोजगार के अवसर पहुंचाकर डाक विभाग ने विकास की नई परिभाषा लिखी है। सुनहरी रेत के विस्तार में बसे जैसलमेर का जीवन आज भी परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक है। यहां जहां एक ओर लोग ऊंट की सवारी और दुर्गों की कहानियों से जुड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर डाक सेवाएं इस मरुभूमि में जीवन की रफ्तार बनाए रखने में सबसे बड़ा योगदान दे रही हैं। पत्र, पेंशन, बीमा या डिजिटल बैंकिंग—डाक विभाग अब हर घर की जरूरत बन चुका है। सरहदी जिले के अनेक गांव अब भी बैंकों की सीमित पहुंच में हैं, लेकिन डाकघरों ने इस कमी को भर दिया है। सुकन्या समृद्धि योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड पीपीएफ और सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम जैसी योजनाओं ने ग्रामीणों को सुरक्षित निवेश का भरोसा दिया है। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के जरिए मोबाइल बैंकिंग और क्यू आर कोड आधारित भुगतान सुविधा ने डिजिटल लेनदेन को गांवों तक पहुंचाया है। अब महिलाएं और बुजुर्ग अपने घर से ही जमा-निकासी कर पा रहे हैं।

रामगढ़ निवासी मंगला देवी बताती हैं कि हम पहले बैंक जाने में झिझकते थे, अब डाकघर ही हमारा बैंक है। वहीं पैसे जमा करती हूं, वहीं से निकालती हूं।

सरकारी लाभ अब सीधे घर तक

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी योजनाएं अब हर गांव के लोगों तक पहुंच चुकी हैं। डाक सेवकों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को बीमा की जरूरत और इसके फायदे समझाए। इसके साथ ही मनरेगा मजदूरी भुगतान, पेंशन वितरण और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं की राशि अब सीधे डाक विभाग के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंच रही है।खुईयाला गांव के गंगाराम बताते हैं कि डाकघर से हम पेंशन लेते हैं, बीमा कराते हैं और बचत भी करते हैं।

कारीगरों और पर्यटन को डाक सेवाओं से नई उड़ान

जैसलमेर के हस्तशिल्पकार और छोटे व्यापारी अब अपने उत्पादों को देशभर में भेज रहे हैं। स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पार्सल सेवा ने उनके कारोबार को नई पहचान दी है। पोस्ट ऑफिस के माध्यम से अब कारीगर अपने उत्पाद जयपुर, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में भेजकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। डाक विभाग के अनुसार जैसलमेर के कारीगरों और ऊंट-चमड़ा उत्पादकों के लिए पार्सल सेवा अब रोजगार का प्रमुख साधन बन चुकी है। इसके अलावा पर्यटन के क्षेत्र में भी डाकघर योगदान दे रहा है। यहां से स्मारक टिकट, पोस्टकार्ड और फिलैटली संग्रह के माध्यम से पर्यटक जैसलमेर की यादें अपने साथ ले जाते हैं। इससे स्थानीय राजस्व में वृद्धि हो रही है।

जनता के लिए डाक सेवक बने बदलाव के वाहक

डाक सेवक अब केवल पत्रवाहक नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज के च्विकास दूतज् बन चुके हैं। वे सरकार की योजनाओं की जानकारी लेकर घर-घर पहुंचते हैं, बुजुर्गों को मोबाइल बैंकिंग सिखाते हैं और महिलाओं को बचत के लिए प्रेरित करते हैं। सुमन देवी, जो एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, कहती हैं -हमारे गांव के डाक सेवक हमें हर योजना की जानकारी देते हैं। वे परिवार जैसा सहयोग करते हैं। नाचना क्षेत्र के निवासी रूपाराम बताते हैं कि पहले पेंशन के लिए ब्लॉक ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब डाक सेवक सीधे घर पहुंचकर पैसा देते हैं।

हर घर तक पहुंचने का संकल्प

डाक विभाग अपनी सभी तरह की सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है। सीमावर्ती क्षेत्र में जहां इंटरनेट नेटवर्क की समस्या है, वहां थोड़ी परेशानियां आ रही हैं लेकिन हमारे कार्मिक ऐसे गांवों तक भी पहुंचने का जज्बा रखते हैं। जैसलमेर मुख्य डाकघर के अधीन पासपोर्ट सेवा केंद्र भी संचालित हो रहा है। जिससे लोगों को बड़ी सुविधा मिली है।

  • सतनाम सिंह, अधीक्षक, मुख्य डाकघर, जैसलमेर