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‘समरसता केवल भारत में हो सकती है, जहां परिवार और समाज मौजूद है’, कोटा में बोले मदन दिलावर

कोटा के वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में ‘सामाजिक समरसता के प्रतीक श्रीराम’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, प्रो. रामनाथ झा, प्रो. बीएल वर्मा व अन्य वक्ताओं ने भगवान राम के आदर्शों, मर्यादा और सामाजिक समरसता पर विचार रखे।

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कोटा

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Arvind Rao

Nov 07, 2025

Madan Dilawar in Kota

'सामाजिक समरसता के प्रतीक श्रीराम' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (फोटो- पत्रिका)

कोटा: वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में गुरुवार को ‘सामाजिक समरसता के प्रतीक श्रीराम’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विवि नई दिल्ली के आचार्य प्रो. रामनाथ झा रहे। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि कोटा विवि के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता वीएमओयू के कुलगुरु प्रोफेसर बीएल वर्मा ने की।


उद्घाटन सत्र के उद्बोधन में प्रो. झा ने भगवान श्रीराम के अनेक प्रतीकों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए हैं कि उन्होंने सभी कार्य नियम से किए और स्त्रियों का आदर किया तथा समाज के वंचितों को जोड़कर रखा और उनको समान दिया। ऐसे में श्रीराम त्याग के प्रतीक हैं।


उन्होंने कहा, पश्चिम में न तो समाज का नियम है और न ही परिवार की अवधारणा। ऐसे में समरसता नहीं हो सकती। समरसता केवल भारत में हो सकती है, जहां परिवार और समाज है। मुख्य अतिथि मदन दिलावर ने कहा कि जब हम सभी इस धरती मां से पैदा हुए, तब ऊंच-नीच नहीं था, लेकिन बाद में लोगों ने स्वार्थवश भेदभाव पैदा किया।


उन्होंने कहा कि राम से बड़ा कोई सेवाभावी और समरसता का भाव पैदा करने वाला नहीं पैदा हुआ। दिलावर ने कहा कि एकजुट रहें और विषमताओं को दूर करें, एक अच्छा समाज बन जाएगा।


विशिष्ट अतिथि प्रो बीपी सारस्वत ने कहा कि सनातन को तोड़ने वालों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता कर रहे वीएमओयू के कुलगुरु प्रो बीएल वर्मा ने कहा कि आज के युवाओं को भगवान राम के आदर्शों से सीखना चाहिए और उनकी न्यायप्रियता तथा अनुशासन का अनुकरण करना चाहिए। स्वागत भाषण संगोष्ठी संयोजक डॉ. कपिल गौतम ने दिया और आभार कुलसचिव एमसी मीणा ने जताया।


लंच के पहले दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें गांधीभवन के तकनीकी सत्र में 32 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र पढ़े और इसकी अध्यक्षता प्रो क्षमता चौधरी ने की तथा मॉडरेटर डॉ. सुरेंद्र कुलश्रेष्ठ रहे। वहीं, दूसरे तकनीकी सत्र में 30 शोध पत्रों का वाचन किया गया और इसकी अध्यक्षता प्रो अनुराधा दुबे ने की तथा मॉडरेटर डॉ. संदीप हुडा रहे।


भगवान राम सभी के आदर्श


समापन सत्र में मुख्य अतिथि कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा रहे। उन्होंने कहा कि भगवान राम हम सभी के आदर्श हैं और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका चरित्र युवाओं के लिए अनुकरणीय है। विशिष्ट अतिथि आरटीयू के कुलगुरु प्रो निमित रंजन चौधरी ने कहा कि हमें आज उस आध्यात्मिक गोल को पाना है, जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके।

संगोष्ठी में 90 से ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो सुबोध कुमार ने किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्रों का वितरण भी किया गया। मंत्री मदन दिलावर और प्रो सारस्वत ने कैंपस में पौधरोपण भी किया।


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