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UP के निजी स्कूलों में शिक्षकों की अर्हता की व्यापक जांच, मानकों के विपरीत पाए गए शिक्षक होंगे बाहर

UP Education: उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की व्यापक जांच की जाएगी। एनसीटीई ने बिना योग्यताओं वाले शिक्षकों से पढ़ाई पर नाराजगी जताई है। अब प्रत्येक जिले से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई तय होगी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Nov 30, 2025

मानकों के विपरीत पाए गए शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, प्रबंध तंत्र से तलब होगा जवाब (फोटो सोर्स : Education Department)

मानकों के विपरीत पाए गए शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, प्रबंध तंत्र से तलब होगा जवाब (फोटो सोर्स : Education Department)

UP Orders Eligibility Audit of All Private School Teachers: उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की व्यापक जांच कराई जाएगी। यह कदम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा व्यक्त की गई नाराज़गी के बाद उठाया गया है। कई निजी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में निर्धारित मानकों की खुले तौर पर अनदेखी की जा रही थी, जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में जांच प्रक्रिया तेज करने का आदेश जारी किया है।

झांसी के राहुल जैन की शिकायत पर हुआ बड़ा एक्शन

इस कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब झांसी निवासी राहुल जैन ने एनसीटीई को प्रमाणों के साथ एक विस्तृत शिकायत भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के अनेक निजी विद्यालयों में ऐसे शिक्षक पढ़ा रहे हैं जिनके पास न तो डीएलएड (BTC), न बीएड डिग्री है, न ही वे सीटीईटी या टीईटी उत्तीर्ण हैं। ये सभी योग्यताएं एनसीटीई द्वारा निर्धारित अनिवार्य मानकों का हिस्सा हैं। राहुल जैन ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूलों में शिक्षक बिना किसी प्रशिक्षित डिग्री के केवल कम वेतन के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एनसीटीई ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग को मामले की तत्काल जांच का निर्देश दिया।

एनसीटीई की सख्त नाराजगी: मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

एनसीटीई ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बने राष्ट्रीय मानकों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षकों की योग्यताएं सुनिश्चित करना न केवल संस्था की जिम्मेदारी है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ सीधे-सीधे जुड़ा मामला भी है। परिषद ने कहा कि बिना प्रशिक्षित शिक्षक कक्षा में शिक्षा का स्तर गिराते हैं, जिससे बच्चों की सीखने की क्षमता और अकादमिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एनसीटीई ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि यदि किसी संस्था में मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त निर्देशात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

जिला विद्यालय निरीक्षकों को मिले सख्त निर्देश

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए तत्काल आदेश जारी किए कि प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अपने-अपने जनपदों में संचालित सभी निजी विद्यालयों में शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता का विस्तृत ब्यौरा तैयार करें।

  • जांच में शामिल होगा:
  • शिक्षक का नाम व पद
  • शैक्षिक योग्यता
  • प्रशिक्षित डिग्री (डीएलएड, बीएड)
  • सीटीईटी/टीईटी योग्यता
  • नियुक्ति पत्र व चयन प्रक्रिया
  • नियमानुसार वेतन भुगतान

जांच में पाया जाएगा कि शिक्षक वास्तव में एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। यदि कोई शिक्षक अयोग्य पाया गया, तो उसे तुरंत शिक्षण कार्य से हटाने का आदेश दिया जाएगा।

बिना अर्हता वाले शिक्षक हटाए जाएंगे, प्रबंधन पर होगी कार्रवाई

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई विद्यालय निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मानकों के विपरीत नियुक्त शिक्षकों को शिक्षण कार्य से हटाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

  • स्थिति गंभीर होने पर:
  • स्कूल की मान्यता निलंबित की जा सकती है
  • प्रबंधन पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है
  • जिम्मेदार पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत कार्रवाई भी संभव
  • यह पहली बार है जब राज्य स्तर पर सभी जिलों में इतनी व्यापक जांच एक साथ की जा रही है।

शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सरकार का सख्त संदेश

प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट है,बिना प्रशिक्षित और अवैध रूप से नियुक्त शिक्षक बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समय-समय पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दे चुके हैं कि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

यह कार्रवाई सुनिश्चित करेगी कि:

  • बच्चों को योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक मिल सकें
  • शिक्षण मानकों का पालन अनिवार्य रूप से हो
  • शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही बढ़े
  • निजी स्कूलों में मनमानी नियुक्तियों पर रोक लगे
  • निजी स्कूलों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

प्रदेश में कई निजी स्कूल लंबे समय से कम लागत पर अयोग्य शिक्षकों की भर्ती कर रहे थे। इससे न केवल मानकों का हनन हो रहा था, बल्कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों के रोजगार के अवसर भी बाधित हो रहे थे। शिकायतों के अनुसार, कुछ स्कूलों में शिक्षक बिना किसी प्रशिक्षण के सिर्फ औपचारिक डिग्री के आधार पर पढ़ा रहे थे, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। यह जांच निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने और पारदर्शिता लाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

माता-पिता ने स्वागत किया

माता-पिता व अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि निजी स्कूल जहां लाखों की फीस वसूलते हैं, वहीं बच्चों के लिए आवश्यक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। अर्हता जांच से शिक्षा में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया

ट्रेंडिंग शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह कदम शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाएगा। प्रशिक्षित शिक्षकों को नौकरियां मिलेंगी और कमीशन आधारित या परिचय आधारित नियुक्तियों को रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि कुछ निजी स्कूलों ने इसे "अत्यधिक सख्ती" बताया, लेकिन सरकार का स्पष्ट कहना है कि बच्चों की शिक्षा के साथ कोई समझौता संभव नहीं है।

जांच के बाद बनेगी राज्य स्तर की रिपोर्ट

सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्टों को संकलित कर माध्यमिक शिक्षा विभाग एक राज्य स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।