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सैनिटरी पैड की फोटो मांगने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, पीरियड शेमिंग पर रोक के लिए जारी होंगे दिशा-निर्देश

पीरियड शेमिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए पूरे देश में मासिक धर्म से जुड़े अपमानजनक व्यवहार पर रोक लगाने के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने पर विचार करने की बात कही। साथ ही केंद्र से जवाब मांगा।

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भारत

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Devika Chatraj

Nov 29, 2025

Supreme Court on period

पीरियड पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त (ANI/Patrika Graphic)

हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में तीन महिला सफाई कर्मचारियों को मासिक धर्म की छुट्टी लेने के लिए अपनी इस्तेमाल की हुई सैनिटरी पैड की फोटो व्हाट्सएप पर भेजने को मजबूर किया गया था। इस बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि वह पूरे देश में महिलाओं-लड़कियों के मासिक धर्म के दौरान उनकी गरिमा, निजता, शारीरिक स्वायत्तता और स्वास्थ्य के अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने पर गंभीरता से विचार करेगा।

जस्टिस की बेंच ने जताई नाराजगी

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की अवकाशकालीन बेंच ने इस तरह की ‘पीरियड शेमिंग’ की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि ये घटनाएं समाज की पिछड़ी मानसिकता को उजागर करती हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, “अगर कोई महिला कर्मचारी मासिक धर्म के कारण भारी काम नहीं कर पा रही है तो काम किसी दूसरे कर्मचारी को दे दिया जाए। इस तरह की घिनौनी जाँच की क्या जरूरत है?”

केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। SCBA के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, अपर्णा भट्ट और प्रज्ञा बघेल सहित अन्य पदाधिकारियों ने कोर्ट से मांग की कि पूरे देश में एकसमान और बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाए जाएँ ताकि शैक्षणिक संस्थानों, हॉस्टल, फैक्टरियों और कार्यस्थलों पर महिलाओं को मासिक धर्म की जाँच के नाम पर अपमानित न किया जाए।

सामने आए कई मामले

याचिका में कहा गया है कि हरियाणा की यह घटना अकेली नहीं है। देश के कई हिस्सों से इसी तरह के अपमानजनक मामले लगातार सामने आ रहे हैं, खासकर असंगठित क्षेत्र की महिला कर्मचारियों के साथ। ये प्रथाएँ संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन, गरिमा, निजता और शारीरिक अखंडता के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन हैं।

मामले की सुनवाई बाकी

हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए गए दो व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए SCBA की सराहना की और कहा कि उम्मीद है इस याचिका से पूरे देश में सकारात्मक बदलाव आएगा। मामला आगे की सुनवाई के लिए लंबित है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी होने वाले दिशा-निर्देश पूरे देश के शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों के लिए बाध्यकारी हो सकते हैं।