
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और सीएम सिद्धारमैया (Photo-IANS)
Karnataka Politics: कर्नाटक में पावर शेयरिंग को लेकर सियासी पारा हाई है। आज सूबे की राजधानी में सीएम और डिप्टी सीएम ब्रेकफास्ट मीटिंग पर मिलने वाले हैं। डिप्टी सीएम शिवकुमार सुबह 9.30 बजे सीएम सिद्धारमैया के घर ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए पहुंचेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं को मिल-बैठकर सियासी संकट का हल निकालने को कहा है।
इससे पहले शुक्रवार को सीएम सिद्धारमैया ने कहा था कि हाईकमान जो भी फैसला करेगा। वह उसका पालन करेंगे। उन्होंने शुक्रवार को यह भी बताया था कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें और शिवकुमार को शनिवार सुबह साथ बैठकर ब्रेकफास्ट पर बातचीत करने के लिए कहा है, ताकि गतिरोध खत्म करने के रास्ते तलाशे जा सकें।
डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार यह बात करते आए हैं कि 2023 के चुनाव के बाद हाईकमान ने उनसे वादा किया था कि 2.5 साल पूरा होने के बाद सीएम कुर्सी शिवकुमार को सौंप दी जाएगी। वहीं, सिद्धारमैया और उनके करीबी नेताओं का कहना है कि ऐसा कोई समझौता हाईकमान के साथ नहीं हुआ था और '2.5 साल के फॉर्मूले' की बात बेबुनियाद है।
साल 2023 में कांग्रेस को कर्नाटक में बंपर जीत मिली थी। 224 विधानसभा सीटों में से पार्टी ने 135 सीटों पर पताका लहराया था। सरकार गठन के समय कहा गया कि कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल का फॉर्मूला तय किया गया है। डिप्टी सीएम के खेमे से कहा जा रहा है कि इस हिसाब से अक्टूबर में CM सिद्धारमैया की अवधि पूरी हो गई है। अब सत्ता का स्थानांतरण शिवकुमार के पास होना चाहिए। इसके लिए कई महीनों से शिवकुमार की लॉबी बेंगलुरु से दिल्ली की चक्कर लगा रही है। हालांकि, सिद्धारमैया इसके लिए अब तक तैयार नहीं दिखे हैं।
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ (केएसएफबीसीसी) ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि राज्य इकाई में अंदरूनी कलह के मद्देनजर सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने का कोई भी प्रयास पार्टी पर असर डालेगा। वहीं, कर्नाटक राज्य वोक्कालिगारा संघ ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ अगर अन्याय हुआ तो वह इसका कड़ा विरोध करेगा।
मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि फिलहाल सीएम सिद्धरामैया के पद पर कोई आंच नहीं आने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान को पता है कि सीएम सिद्धारमैया प्रदेश में OBC चेहरा हैं। उन्हें अहिंदा समुदाय के साथ पार्टी के 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के पास सदन में कुल 137 विधायक हैं। ऐसे में बगैर सिद्धारमैया की सहमति के सीएम फेस बदलना मुश्किल है।
Published on:
29 Nov 2025 08:59 am
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