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ALERT: दिल्ली में हवा के साथ अब पानी पर भी संकट! सामने आई CPCB की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Delhi CPCB Report: दिल्ली में हवा और पानी दोनों की गुणवत्ता बिगड़ती नजर आ रही है। CPCB की नई रिपोर्ट में भूजल में यूरेनियम और अन्य खतरनाक मेटल्स मिले हैं, जो मानक के अनुसार नहीं है, जबकि AQI 350 के पार पहुंच चुका है।

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Delhi CPCB report related to minerals in water and AQI update

दिल्ली में हवा के साथ पानी की गुणवत्ता भी खराब।

Delhi CPCB Report: दिल्ली की हवा और पानी को लेकर चिंताजनक बातें सामने आ रही हैैं। पानी और हवा दोनों एक व्यक्ति के जीने के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन एक तरफ, दिल्ली की प्रदूषित हवा लगातार चर्चा का विषय बनी है, क्योंकि दिल्ली का एवरेज AQI कम ही नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी ओर, हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दिल्ली के पानी की क्वालिटी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट के आंकड़ें चौंकाने वाले हैं और साथ ही यह आंकड़े दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकते हैं। हाल ही में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नई रिपोर्ट में दिल्ली के भूजल की क्वालिटी को लेकर कई गंभीर बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के भूजल में कुछ खतरनाक मेटल्स जैसे यूरेनियम, सीसा, नाइट्रेट और फ्लोराइड का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली यूरेनियम की ज्यादा मात्रा के मामले में पूरे देश में तीसरे नंबर पर है। यह स्थिति लोगों की हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

कितना खतरनाक हो सकता है ये पानी?

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ जगहों पर पानी में मेटल्स और केमिकल्स की मात्रा मानकों के अनुसार बहुत ज्यादा पाई गई। ऐसे पानी से किडनी खराब होने, बच्चों के विकास पर असर और कैंसर का खतरा हो सकता है। जांचे गए 135 सैंपल में से, 33% सैंपल पानी में इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, 24% में नाइट्रेट और 51% में RSC यानी अवशिष्ट सोडियम कार्बोनेट की मात्रा बहुत ज्यादा थी। दूसरी ओर, शनिवार को भी दिल्ली के AQI स्तर में कुछ खास बदलाव नजर नहीं आया। धौला कुआं में AQI 372, जबकि आनंद विहार और गाजीपुर में 358 दर्ज किया गया। ITO में भी हालात अच्छे नहीं दिखे और वहां AQI 345 रिकॉर्ड हुआ। सभी जगह एक्यूआई बहुत खराब की श्रेणी में ही दर्ज हुआ।

दिल्ली में क्षेत्रवार एक्यूआई की स्थिति

दिल्ली में एक्यूआई की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है। शनिवार सुबह आठ बजे दिल्‍ली का औसतन एक्यूआई 335 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब की श्रेणी में आता है। इस दौरान मुंडका में एक्यूआई 359, बवाना में 360, जहांगीरपुरी में 356, वजीरपुर में 348, रोहिणी में 362, डीटीयू में 351, आनंद विहार में 350, पंजाबी बाग में 352, नरेला में 389, नोएडा में 340, ग्रेटर नोएडा में 316, गाजियाबाद में 326, गुरुग्राम में 286 और फरीदाबाद में एक्यूआई की मात्रा 210 रिकॉर्ड की गई। गुरुग्राम और फरीदाबाद में एक्यूआई की स्थित खराब और बाकी जगहों पर बेहद खराब दर्ज की गई। एक्सपर्ट की मानें तो अगले छह दिनों तक कमजोर हवाओं और गिरते तापमान के चलते प्रदूषण की स्थिति में कोई खास बदलाव होता नहीं दिख रहा है।

व्यवस्‍था की खामियां दूर हों तो मिल सकती है राहत

एक्सपर्ट का कहना है कि दिल्ली में लंबे समय तक प्रदूषण की खराब स्थिति कोई मौसमी समस्या नहीं, बल्कि यह व्यवस्‍था में खामियों का परिणाम है। सीएसई यानी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की हालिया रिपोर्ट में इसे 'सार्वजनिक स्वास्‍थ्य संकट' कहा गया है। सीएसई के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 के सबसे बड़े स्‍त्रोत स्‍थानीय हैं। इसमें परिवहन से 39 प्रतिशत, उद्योग और निर्माण इकाइयों से 20 प्रतिशत और सड़क पर उड़ने वाली 18 प्रतिशत धूल का योगदान है। एक्सपर्ट का कहना है कि पराली जलाने का प्रभाव नवंबर में दिखता है, लेकिन दिल्ली में स्‍थानीय स्‍त्रोत हमेशा प्रदूषण बढ़ने का कारण बने रहते हैं।

देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बना दिल्ली

क्लाइमेट ट्रेंड्स की ताजा रिपोर्ट की मानें तो लगभग एक दशक से दिल्ली देश के सबसे प्रदूषित सिटी बनी है। साल 2015 से 2025 के बीच रिपोर्टों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि दिल्ली में हर साल सबसे ज्यादा प्रदूषण दर्ज किया जाता है। हालांकि साल 2020 में कुछ हद तक सुधार दिखा, लेकिन साल 2025 में औसतन एक्यूआई 180 के आसपास ही रहा। यह भी सुरक्षित सीमा से बहुत दूर है। एक्सपर्ट इसके लिए सड़कों पर यातायात का दबाव, औद्योगिक उत्सर्जन, ठंड में तापमान की कमी और इंदिरा गांधी मैदान के आसपास पराली जलाने जैसी समस्याओं को इसका जिम्मेदार बताते हैं। वहीं मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दियों में हिमालय की भौगोलिक स्थिति के चलते प्रदूषक तत्व हवा में कैद हो जाते हैं। इस दौरान तापमान की कमी और हवा की रफ्तार के चलते हालात बिगड़ते हैं।