
फोटो सोर्स: पत्रिका
MP News: शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अनधिकृत रूप से काटी गई अवैध कॉलोनियों के रहवासियों को भवन निर्माण सहित अन्य तरह के कार्यों के लिए अनुमति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो अब राज्य सरकार ने भी कैबिनेट मंत्री और शहर विधायक चेतन्य काश्यप के पत्र पर गंभीरता से काम करते हुए इन कॉलोनियों में विकास कार्यों के लिए 13 करोड़ 48 लाख रुपए की मंजूरी दे दी है।
महापौर प्रहलाद पटेल ने भी एमआईसी से प्रस्ताव पारित करते भिजवा दिया है। कॉलोनियों के विकास कार्यों में खर्च होने वाली राशि का यह एक बड़ा हिस्सा होने से रहवासियों पर इसका बोझ कम होने से राहत मिलेगी।
शहर में बसी अनधिकृत और अवैध कॉलोनियों के नक्शे बनाने के दौरान 64 में से 58 कॉलोनियों के नक्शे प्रकाशित किए जा चुके हैं। शेष रही कॉलोनियों के नक्शों पर काम चल रहा है। इनमें कितना विकास कार्य और कितना खर्च होगा इसका भी आकलन किया जा रहा है। इन कॉलोनियों के रहवासियों को निगम से सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। निगम की तरफ से अब आम नागरिकों की तरह सभी कॉलोनियों में सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
निगम से मिली जानकारी के अनुसार जिन 64 कॉलोनियों को अनधिकृत और अवैध की श्रेणी में लेकर इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू गई है उनमें निगम के उपयंत्रियों की तरफ से बनाए गए एस्टीमेट के अनुसार करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कुछ कॉलोनियों में ज्यादातर काम पहले से ही हैं। शेष कार्यों के लिए एस्टीमेट तैयार कर लिए गए हैं। इनमें 13 करोड़ रुपए राज्य सरकार की तरफ से स्वीकृति मिलने से एक बड़ी राहत मिल रही है।
अनधिकृत कॉलोनियों को विधिवत रूप से वैध करने के लिए कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए तीन तरह से राशि मिलेगी। इसमें नगर निगम और जनता को अपनी तरफ से राशि देना है। साथ ही विधायक चेतन्य काश्यप ने शासन से भी राशि दिलाने की पहल की और इसकी स्वीकृति भी करवा ली है। यह रासि 13 करोड़ 48 लाख रुपए है जो कुल खर्च का 30 से 40 फीसदी है।
अनधिकृत और अवैध कॉलोनियों को निगम में नियमित करने के लिए राज्य सरकार से नगर निगम को राशि दिलाने में मंत्री चेतन्य काश्यप की विशेष पहल रही है। 13 करोड़ से ज्यादा राशि की स्वीकृति हो गई है। एमआईसी से इसका प्रस्ताव भी पास करके भेज दिया गया है।- प्रहलाद पटेल, महापौर, रतलाम
शहर में 2016 से पहले अनधिकृत और अवैध रूप से काटी गई कॉलोनियों में भूखंड काटकर लोगों को कॉलोनाइजरों ने बेच दिए थे। वहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं होने और न ही कॉलोनी वैध होने से नगर निगम से किसी तरह की सुविधा मिल पा रही थी। हजारों परिवार इस संकट से जूझ रहे थे। उन्हें न तो भवन निर्माण की अनुमति मिल रही थी और न ही पेयजल सहित सडक़, नाली की सुविधा ही निगम से मिल पा रही थी।
Updated on:
29 Sept 2025 04:07 pm
Published on:
29 Sept 2025 04:06 pm
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