
सिवनी. कृषि प्रधान सिवनी जिले में हर वर्ष किसान कभी पानी तो कभी यूरिया की किल्लत की वजह से परेशान होते हैं। जिम्मेदारों के ध्यान न देने पर किसानों को सडक़ पर उतरकर प्रदर्शन एवं चक्काजाम तक करना पड़ता है। ऐसे में स्थिति बिगड़ती है। खरीफ सीजन के बाद अब किसान रबी सीजन में फसल की बुआई में जुट गए हैं। जल्द ही उन्हें खाद की भी आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में बेहतर व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदारों को सक्रिय रहना पड़ेगा। बता दें कि जिले में 3 लाख 83 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल बोई जाती है। किसान गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी सहित अन्य फसल की बोवनी करते हैं। इसके बाद उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए खाद की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विभाग की मानें तो जिले में इस बार यूरिया, डीएपी, एनपीके का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। ऐसे में किसानों को इसके लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बता दें कि रबी सीजन एक अक्टूबर से अप्रेल तक रहता है। किसान अक्टूबर से दिसंबर तक बोवनी करते हैं।
किसानों को आती है यह समस्या
सोसायटी, डबल लॉक केन्द्रों में किसान यूरिया के लिए सुबह से ही कतार में खड़े हो जाते हैं। इसके बावजूद भी कई बार ऐसी स्थिति बनती है कि उन्हें खाद नहीं मिल पाता। उन्हें टोकन देकर अगले हफ्ते आने को कहकर परेशान किया जाता है। कई बार चक्कर काटने और खाद न मिल पाने की वजह से वे आक्रोशित होते हैं और फिर व्यवस्थाएं बिगड़ती हैं। खरीफ सीजन में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी।
57 सोसायटी से बंटती है यूरिया
जिले में किसानों को यूरिया, डीएपी, एनपीके का वितरण 57 सोसायटी, सात डबल लॉक केन्द्र, तीन मार्केटिंग सोसायटी एवं एक एमपी ग्रो के माध्यम से किया जाता है। इस बार भी यही व्यवस्था बनाई गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान इन जगहों से यूरिया, डीएपी, एनपीके प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि जितनी आवश्यकता है किसान उतना ही खरीदें।
अब तक 21 मिट्रिक टन बंट चुकी है यूरिया
कृषि विभाग की मानें तो जिले में रबी फसल की बोवनी को लेकर अब तक अब तक 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया आ चुकी है। इसमें से 21 हजार 423 मीट्रिक टन बंट चुकी है। 8636 मिट्रिक टन बुधवार तक शेष थी। 950 मिट्रिक टन और यूरिया आई है। गुरुवार रात में 900 मिट्रिक टन और आ जाएगी। नियमित अंतराल पर छिंदवाड़ा, जबलपुर, सिननी, बालाघाट सहित अन्य जगहों से यूरिया की रैक आ रही है। वहीं जिले में अब तक 12530 मिट्रिक टन डीएपी आ चुकी है, जिसमें से 4783 बची हुई है। वहीं एनपीके 10990 मीट्रिक टन आया था। जिसमें से 6229 शेष बचा है।
इनका कहना है…
जिले में किसानों के लिए प्रर्याप्त यूरिया, डीएपी, एनपीके उपलब्ध है। किसान सोसायटी, डबल लॉक केन्द्र से प्राप्त कर सकते हैं। व्यवस्थाएं हर बार बेहतर रहती हैं। कभी कभार ही रैक आने में दिक्कत होती है।
एसके धुर्वे, उपसंचालक, कृषि
Updated on:
21 Nov 2025 12:51 pm
Published on:
21 Nov 2025 12:50 pm
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