श्रीगंगानगर.प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर ग्राम पंचायत चार जैड में हुआ फर्जीवाड़ा प्रकरण में एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने के बावजूद न तो 7.20 लाख की गबन राशि की वसूली गई है और न ही किसी दोषी कार्मिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई है। मामला अब ठंडे बस्ते में पहुंच चुका है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर देरी के पीछे कौन-सी मजबूरियां या दबाव हैं? क्या यह राजनीतिक संरक्षण का मामला है या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत का परिणाम?
उल्लेखनीय है कि जांच रिपोर्ट में ग्राम पंचायत चार जैड के तत्कालीन सरपंच (वर्तमान प्रशासक) बेअंत सिंह, ग्राम विकास अधिकारी संदीप मोंगा, कनिष्ठ अभियंता गुरजीत सिंह, योजना प्रभारी पमी देवी, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रभुराम तथा जिला परिषद स्तर पर जीओ टैगिंग प्रभारी लक्की गुप्ता व एक अन्य कार्मिक को दोषी पाया गया था। जांच समिति ने सभी से गबन की राशि वसूलने और चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की गई थी,लेकिन आज तक विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह था मामला
वर्ष 2024 में पंचायत समिति श्रीगंगानगर के विकास अधिकारी भंवरलाल स्वामी की प्रारंभिक जांच में सरपंच और वीडीओ सहित सात कार्मिक दोषी पाए गए थे। जांच में खुलासा हुआ कि 12 अपात्र व्यक्तियों को आवास योजना की पहली और दूसरी किश्त जारी कर दी गई, जबकि पात्र परिवारों को लाभ से वंचित कर दिया गया। इसके बाद तत्कालीन जिला परिषद सीईओ मृदुल सिंह ने जिला परिषद के सहायक परियोजना अधिकारी विक्रम सिंह जोरा के नेतृत्व में एक टीम से विस्तृत जांच करवाई थी। रिपोर्ट में चार्जशीट और वसूली की सिफारिश की गई, पर कार्रवाई अब तक अटकी हुई है।
पत्रिका व्यू:
एक साल बाद भी यह मामला विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब जांच में दोष सिद्ध हो चुका है,तो कार्रवाई में देरी क्यों? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या जानबूझकर की गई ढिलाई? प्रधानमंत्री आवास जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार के बावजूद दोषियों का बच निकलना पूरे सिस्टम की साख पर प्रश्न चिह्न है। अब देखना यह है कि जिला परिषद सीईओ और जिला प्रशासन इस फाइल को ठंडे बस्ते से निकालकर कब दोषियों को जवाबदेह ठहराते हैं।
गबन की राशि की वसूली
ग्राम पंचायत चार जैड प्रकरण में गबन की राशि की वसूली और दोषी कार्मिकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।