
सांकेतिक फोटो जेनरेट AI
वाराणसी में आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले इरशाद अली को पॉक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी को उसकी आखिरी सांस तक फंदे पर लटकाया जाए। कोर्ट ने उस पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसला सुनते ही इरशाद कोर्ट में रो पड़ा। दया की अपील करने लगा।
दिसंबर 2024 में हुई इस वारदात का ट्रायल 11 महीनों में पूरा कर लिया गया। सिर्फ छह महीनों में गवाह, विवेचक और पीड़ित पक्ष की गवाही हो गई थी। पुलिस ने घटना के अगले ही दिन मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जिसमें उसके पैर में गोली लगी थी।
25 दिसंबर की सुबह सुजाबाद चौकी क्षेत्र के एक गांव में स्कूल की बाउंड्री के भीतर बच्ची का अर्धनग्न शव मिला। बच्ची पिछले दिन शाम सात बजे घर से निकली थी। वापस नहीं लौटी। शव प्लास्टिक की बोरी में भरा हुआ था। हाथ-पैर टूटे थे। शरीर पर गहरी चोटों के निशान थे। परिजनों ने रात में ही गुमशुदगी दर्ज करा दी थी। लेकिन उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। तब तक शव उठाने से इनकार कर दिया। जब तक आरोपी की गिरफ्तारी न हो जाए। आश्वासन के बाद वे पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार हुए।
DCP काशी जोन गौरव बंसवाल का कहना है कि पूछताछ में इरशाद ने क़बूल किया कि उसने बच्ची को दुकान जाते देखा और लौटते समय मौका पाकर उसे अपने घर के पास रोक लिया। आसपास किसी के न होने पर वह उसे घर के अंदर ले गया। नशे की हालत में वह 5–7 मिनट तक दुष्कर्म की कोशिश करता रहा। जब वह असफल हुआ तो उसने पत्थर से बच्ची का सिर कुचल दिया। फिर उसके हाथ-पैर बांधकर शव को बोरी में भर दिया। आधी रात में जब इलाका शांत हुआ। तो वह लाश को स्कूल के अंदर फेंककर भाग गया।
परिजनों से बातचीत के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में लगे कैमरों की जांच की। इसी दौरान आरोपी का संदिग्ध फुटेज मिला। पुलिस कमिश्नर ने लापरवाही पर फटकार लगाई। और चार टीमों को उसकी तलाश में लगाया गया। इरशाद राज्य से भागने की कोशिश में था। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
Published on:
19 Nov 2025 12:39 pm
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