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हवाई सुविधाओं से अब भी महरूम जिलेवासी,

हवाई सुविधाओं से अब भी महरूम जिलेवासी, जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से थमा विकास एयर कनेक्टिविटी की राह में रोड़ा, दो प्रस्ताव लौटे, जमीन तलाशने में भी नाकाम अफ सर

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deprived of air connectivity

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deprived of air connectivity,

जिला आज भी हवाई सेवाओं के मामले में प्रदेश के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। औद्योगिक विकास, वीआईपी मूवमेंट और आपातकालीन सेवाओं की बढ़ती जरूरतों के बावजूद जिले में एयर कनेक्टिविटी की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। वर्षों से जिले के लोग एयर स्ट्रिप या स्थाई हेलीपैड जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन शासन से मिले प्रस्ताव भी फ ाइलों में ही दबकर रह गए और विभागीय लापरवाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
जमीन तक तय नहीं कर पाए अफ सर
जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग के पास पिछले कुछ वर्षों में दो बार शासन की ओर से जिले में हवाई पट्टी निर्माण से संबंधित प्रस्ताव आए। लेकिन विभागीय स्तर पर इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो सकी। न तो उपयुक्त भूमि की पहचान हो पाई और न ही फ ाइल आगे बढ़ सकी।लोनिवि के एसडीओ राजेश श्रीवास्तव बताते हैं कि शासन ने दोनों बार जानकारी और प्रस्ताव मांगे थेए लेकिन कुछ विशेष कारणों से फ ाइल आगे नहीं बढ़ पाई। उनका यह भी कहना है कि जिले में उपयुक्त भूमि मिलना भी एक बड़ी चुनौती है।हालांकि जानकारों का मानना है कि समस्या केवल भूमि की उपलब्धता की नहीं, बल्कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की भी है। यदि इच्छा शक्ति हो, तो सरकारी जमीनों या बड़े कृषि भूखंडों के अधिग्रहण का विकल्प तलाशना मुश्किल नहीं है।
जिले में क्यों जरूरी है एयर कनेक्टिविटी
नरसिंहपुर जिला राजनीतिक, औद्योगिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। यहां प्रदेश शासन के दो प्रमुख विभागों की कमान संभालने वाले मंत्री भी रहते हैं। इसके बावजूद जिले में हवाई सुविधा का न होना सवाल खड़ा करता है।यहां समय.समय पर केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री, अधिकारी और अन्य वीआईपी आते.जाते रहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र के दो बड़े प्रोजेक्ट्स भी जिले में विकसित हो रहे हैं। आने वाले समय में कॉर्पोरेट जगत की आवाजाही बढऩे की पूरी संभावना है। ऐसे में एयर कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता विकास में बड़ा अवरोध बन रही है।
आपातकालीन सेवाओं पर भी असर
हवाई पट्टी न होने का सबसे गंभीर असर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देता है। पीएम श्री एंबुलेंस से किसी गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कराना हो तो उसे जबलपुर तक ले जाना पड़ता है। यह देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।जिले में एयर एंबुलेंस के उतरने की सुविधा न होने के कारण मरीजों को आधुनिक उपचार समय पर नहीं मिल पाता। इसके अलावा हाल ही मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई हेलीकॉप्टर तीर्थ यात्रा सेवा का भविष्य में विस्तार होना है। यदि सेवा जिले में शुरू होती है तो हजारों लोगों को लाभ मिल सकता है, लेकिन इसके लिए भी हेलीपैड जैसी बुनियादी सुविधा का होना अनिवार्य है।
उदासीनता से थमा विकास पर उम्मीद बाकी
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय रूख अपनाते तो आज स्थिति अलग होती। प्रदेश के कई छोटे जिलों में एयर स्ट्रिप और हेलीपैड की सुविधा विकसित हो चुकी है, लेकिन नरसिंहपुर आज भी शुरुआत की पायदान पर ही खड़ा है। जिले के उद्योग, पर्यटन, चिकित्सा सेवाओं और निवेश के विस्तार के लिए एयर कनेक्टिविटी अत्यंत जरूरी है। लेकिन अफ सरशाही की धीमी गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से यह सपना साकार नहीं हो पा रहा।
शासन की ओर से दो बार प्रस्ताव भेजा जाना बताता है कि जिले की जरूरतों को सरकार भी समझती है। अब जरूरत है कि आगे बढकऱ जमीन की पहचान, तकनीकी सर्वे और प्रशासनिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए। जिले के विकास की रफ्तार तभी बढ़ेगी जब हवाई सेवा जैसी आधुनिक सुविधाएं यहां उपलब्ध होंगी।फि लहाल, नरसिंहपुर के लोग इस इंतजार में हैं कि कब उनका जिला भी हवाई नक्शे पर अपनी पहचान बनाएगा और कब एयर कनेक्टिविटी का सपना हकीकत में बदल पाएगा।