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आधा शिक्षण सत्र बीता फिर भी कई स्कूलों में कक्ष व शौचालय निर्माण अधूरा

academic sessionनरसिंहपुर. जिले में शैक्षणिक सत्र का आधा समय निकल चुका है, लेकिन कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों तथा शौचालयों का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। स्वीकृत निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि इनके जल्द पूरा होने की संभावना भी दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही।जिले […]

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टोला स्कूल के बच्चे बाहर बैठकर पढ़ाई करते हुए। स्कूल की हालत जो लंबे समय से खराब है।

टोला स्कूल के बच्चे बाहर बैठकर पढ़ाई करते हुए। स्कूल की हालत जो लंबे समय से खराब है।

academic sessionनरसिंहपुर. जिले में शैक्षणिक सत्र का आधा समय निकल चुका है, लेकिन कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों तथा शौचालयों का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। स्वीकृत निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि इनके जल्द पूरा होने की संभावना भी दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही।
जिले में 32 स्कूलों में 35 अतिरिक्त कक्ष का कार्य कराने के लिए शासन ने राशि स्वीकृत की थी। लेकिन अब तक 30 कक्ष की पूर्ण हो सके हैं। पांच कक्षों का कार्य चल रहा है जो कब पूरा होगा इसका शिक्षकों और बच्चों को भी इंतजार है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां जगह की कमी बनी है, बच्चों को शिक्षक अपनी सुविधा और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कक्षा लगाकर पढ़ाई करा रहे हैं। यही हालत शौचालय निर्माण कार्य की है। जिसमें 107 स्कूलों में शौचालय के कार्य पूरे हो सके हैं। जबकि 38 स्कूलों में कार्य अधूरे हैं। तीन स्कूल खैरीखुर्द बालक-बालिका स्कूल एवं सांईखेड़ा विकासखंड के तहत आने वाले नब्बा टोला स्कूल में तो कार्य ही शुरू नहीं हो सका है। क्योंकि शासन ने 20-20 हजार रुपए की जो राशि स्वीकृत की है उससे कार्य होने में स्कूलों ने असमर्थता जताते हुए नए सिरे से ही शौचालयों का निर्माण कार्य कराने की बात विभाग से कह दी है। ताकि छात्रों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित सुविधा उपलब्ध हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के अधूरे निर्माण का असर सीधे शिक्षण कार्य की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में कक्षों की कमी से बच्चों को अस्थायी कमरों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।