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जैन मुनि अनुत्तर सागर की अनूठी साधना, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के बाद बनाया अब यूएस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड

मंगलगिरी में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर के संघ में मुनि अनुत्तर सागर ने 2400 से अधिक उपवास बिना अन्न जल ग्रहण किए हैं। मुनि के लगातार उपवास जारी है। उपवास व मौन रहकर जो कठोर तपस्या की, वो यूएस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ है। मुनि को चरित्र शिरोमणि की उपाधि से नवाजा गया है।

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सागर

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Rizwan ansari

Nov 30, 2025

मंगलगिरी में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर के संघ में मुनि अनुत्तर सागर ने 2400 से अधिक उपवास बिना अन्न जल ग्रहण किए हैं। मुनि के लगातार उपवास जारी है। उपवास व मौन रहकर जो कठोर तपस्या की, वो यूएस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ है। मुनि को चरित्र शिरोमणि की उपाधि से नवाजा गया है। इसके पहले 1400 उपवास पूर्ण होने पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हुआ था। दुनिया में सर्वाधिक जैन धर्म के व्रत रखने वाले व्यक्ति के तौर पर मुनि अनुत्तर सागर महाराज दर्ज हुए हैं। मुनि एक दिन एकाहार के बाद 2 दिन लगातार उपवास किए हैं। यह साधना उनकी निरंतर जारी चल रही है। जैन मुनि कहते हैं कि अभ्यास और साधना के साथ यह संभव हुआ है। उन्होंने ये उपवास किसी रिकार्ड के लिए नहीं बल्कि मोक्ष मार्ग की प्राप्ति के लिए किए हैं।

2011 में ली थी दीक्षा

भोपाल में 6 अगस्त 1977 को जन्मे अनुत्तर सागर महाराज का छोटी उम्र में ही वैराग्य हो गया था। 1996 में वे सन्यास के मार्ग पर आए और 2011 में जैन मुनि बन गए। मुनि को शुरुआत से ही उपवास व्रत कठिन तपस्या का रुझान दिखने लगा था। शुरुआत में ही उन्होंने सम्मेद शिखर पर 183 दिनों में से 153 दिन अन्न जल ग्रहण न करते हुए मौन साधना की थी। बचपन से ही 48 और 72 घंटे के कठिन व्रत रखते थे। फिर जैन शास्त्रों में जो उपवास हैं वो जैन मुनि बनते ही शुरु कर दिए। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज से उन्होंने जैन शास्त्रों का अध्ययन किया।

एक हजार दिन का किया था मौन

अभिराज भैया ने बताया कि कोरोना के 3 वर्षों के दौरान भी मुनि महाराज ने एक हजार दिनों का मौन व्रत धारण कर लिया था। इस समय भी 1008 सहस्त्रनाम का उपवास चालू है। इसमें 961 व्रत हो चुके हैं। वे बताते हैं ये उपवास इंटिमेट फास्टिंग की तरह होते हैं। यानि दो दिन में एक बार अन्न, जल फिर 2 दिन का त्याग। फिर अन्न जल ग्रहण और 3 दिन अन्न जल ग्रहण का त्याग। इसी तरह से दिनों की संख्या बढ़ती जाती है। यूं भी जैन मुनि पूरे दिन में एक बार ही आहार जल लेते हैं।

ये उपवास किए पूर्ण चौसठ ऋद्धि व्रत के 64 उपवास

तपशुद्धि के 78 उपवास
दु:खहरण के 68 उपवास
सुख कारण के 68 उपवास
सर्वतोभद्र के 75 उपवास
शांतकुंभ के 45 उपवास
नवकार के 35 उपवास
ब्रजमध्य के 29 उपवास
नक्षत्रमाला के 27 उपवास
भावनाविधि के 25 उपवास
कल्याणमाला के 25 उपवास
दर्शन विशुद्धि के 24 उपवास
दीपमालिका के 24 उपवास
तीर्थकर व्रत के 24 उपवास
बारह बिजोरा के 24 उपवास
समवसरण के 24 उपवास